हम अपनी लाइफ किस तरह जीते है ये काफी हद तक तय करता है की हम लाइफ मे कितने हैल्थी एंड वैल्थी होंगे और लाइफ को जीने का तरीका है लाइफस्टाइल यानि जीवन शैली हमारी लाइफस्टाइल मे हमारे खाने , सोने जागने मनोरंजन करने एक्सरसाइज करने से लेकर पहनावे तक सब कुछ शामिल है जो हमारी जिंदगी की दिशा और दशा दोनों तय करते है। समस्याओं से निपटने , रेकवरी करने , तनाव से बचने और लाइफ में quality को विकसित करने के लिए एक पॉजिटिव लाइफस्टाइल का होना काफी जरुरी है लेकिन तेज़ी से बदलते माहौल में लोगो की जीवनशैली में काफी बदलाव आया है जिससे कैंसर , डिप्रेशन , हार्ट डिजीज ,स्टेस , डाइबिटीज़ ,हाई ब्लड प्रेशर , मोटापा , आखों मे दिक़्क़त , सिर मे दर्द जैसी समस्याएं काफी देखी जा सकती हैं।

इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए आज हम पूरी तरह दवाइयों पर निर्भर हैं। जिससे परेशानियाँ सिर्फ कुछ समय के लिए गायब हो जाती है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती क्योंकि असल मे समस्या हमारे रहन सहन के तरीके में हैं। इसलिए एक स्वस्थ और सकारात्मक जीवन के लिए एक पॉजिटिव लाइफस्टाइल का होना बहुत जरुरी हैं।

वैदिक एक्सूप्रेसर का मतलब मानव शरीर में स्थित पॉइंट का ज्ञान ही एक स्वस्थ जीवन शैली हैं और इस जीवन शैली का हेल्थ से गहरा सम्बन्ध हैं यह तो हम मानने लगे हैं कि इस भाग – दौड़ भरे जीवन मे मानव जीवन शैली जो मानव शरीर के अनुसार हमारे पूर्वजो व गुरुओ द्वारा हमें जीवन संस्कार के रूप मे दी गयी यह मानव जीवन मे दुर – दुर तक आज दिखाई नहीं देती।

एक्सूप्रेशर द्वारा इलाज़ के साथ साथ इन्हे अधिक प्रभावी व् कारगर बनाने के तरीको को भी जानना जरुरी हैं।

  • अनुभवी चिकित्सक द्वारा एक्सूप्रेशर ट्रीटमेंट करवाये।
  • एक्सूप्रेशर पॉइंट का सही सही ज्ञान होना।
  • एक्सूप्रेशन विशेष मुद्राओ का महत्व।
  • वैदिक एक्सूप्रेशर के वैज्ञानिक आधार को समझना।
  • वैदिक एक्सूप्रेशर के अनुसार वैदिक जीवन शैली अपने जीवन मे ढालना।

वैदिक एक्सूप्रेशर न केवल हमारे शरीर हमारे मस्तिक को प्रभावित करता हैं। बल्कि एक्सूप्रेशर ट्रीटमेंट के समय स्वास – प्रस्वास की क्रिया व् रिदम हमारे प्राण ऊर्जा पर असर डालते है जिसका सीधा -२ प्रभाव हमारी हेल्थ पर होता है। नियमित एक्सूप्रेशर करने से नर्वस सिस्टम व् प्राण ऊर्जा प्रभावित होती है और यही वजह है कि एक्सूप्रेशर का प्रभाव हमारे स्वास्थ पर पड़ता है।
वैदिक एक्सूप्रेशर जीवन शैली द्वारा संतुलन बनाकर हम स्वस्थ रह सकते है। यह आयुर्वेद के मूल सिद्धांत पर आधारित है। आयुर्वेद की माने तो वात , पीत और कफ ये तीन तत्वों के संतुलन से ही शरीर स्वस्थ रहता है हमारे हाथो मे जो मैगनेटिक वेव्स होती है उनका प्रयोग करके हम वात , पीत और कफ को संतुलित कर सकते है इसमें असंतुलन होने पर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मे कमी आ जाती है। इन् तत्वों को संतुलित रखने का सबसे कारगर तरीका है वैदिक एक्सूप्रेशर ।

अपनी सुविधा के अनुसार रोज हमारी दिनचर्या में वैदिक एक्सूप्रेशर /जीवन शैली को जोड़कर हम अपने शारीरिक और मानसिक संतुलन को स्वस्थ रख सकते हैं।

  1. कोशिश करें कि आप और आपकी सभी चीजें हमेशा व्यवस्थित रहे बहुत से लोग खुद भी अस्त-व्यस्त रहते हैं और अपना घर ऑफिस कोडेस्क को भी अस्त-व्यस्त देखते हैं जिससे न सिर्फ वे खुद भी परेशान है बल्कि लोगों पर उनका प्रभाव भी अच्छा नहीं पड़ता।
  2. अपने सोच और अप्रोच हमेशा सकारात्मक और प्रगतिशील रखें नकारात्मक सोचने वालों के साथ ज्यादा बातचीत ना करें।
  3. रात को जल्दी सोने की आदत डालें और सुबह भी जल्दी उठे।
  4. हल्का व्यायाम जरूर करें और हेल्दी नाश्ता करें ऑफिस के वर्क लोड को अपने साथ कभी भी घर पर न लेकर आएं वहां का प्रेशर वहां के तनाव वहीं छोड़कर आए अपने परिवार के साथ इंजॉय करें।
  5. रोजाना अपनी टू डू लिस्ट अपडेट करें यानी दिन भर में आपको जो भी काम करना हो उसकी लिस्ट बनाए।
    खाना हमेशा आराम से चबा चबा कर खाएं यह आपकी सेहत और पाचन शक्ति के लिए अच्छा होगा।
  6. रीडिंग हैबिट डेवेलप करे यानि रोजाना कोई अच्छी किताब अच्छा साहित्य जरूर पढ़ें यह न सिर्फ आपका ज्ञान बढ़ाएगा बल्कि आपको सकारात्मक बनाकर रचनात्मक भी बढ़ाएगा।
  7. अखबार जरूर पढ़ें या फिर न्यूज़ देखें ताकि आपकी जानकारी अपडेट रहे।
  8. बैठते समय ध्यान रखें पैरों को क्रॉस करके न बैठें इससे रक्त संचार में रुकावट पैदा होती है ।जिससे पेट दर्द कमर दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।